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Tuesday, October 19, 2021

कोरोना की कराह

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Dhananjay Gangay
Dhananjay Gangay
Journalist, Thinker, Motivational speaker, Writer, Astrologer🚩🚩
पढने में समय: 2 मिनट

Covid-19 वैक्सीन की खोज के साथ सभी खुश थे कि इस महामारी पर मानव को विजय वैजयंती मिल गयी है लेकिन तुम डाल – डाल तो कोरोना पात – पात वह निरन्तर अपने में उत्परिवर्तन (Mutation) करके इस बार और अधिक मारक बन कर आया है।

इस बार नई चीज यह है कि जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है उन्हें फिर से कोविड अपनी गिरफ्त में ले रहा है हालांकि जिन्हें वैक्सीन मिल गई है उनमें यह पहले की तरह मारक तो नहीं बनेगा लेकिन वो लोग संक्रमण को फैला जरुर सकते हैं। नई स्ट्रेन बहुत तेजी से फैलाव ले रही है, मार्च आखिर से शुरू हुआ दौर 11 अप्रैल तक, भारत में 11 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है।

भारत की वर्तमान वैक्सीनेशन दर विश्व में सर्वाधिक है, 10 करोड़ लोगों को कोशील्ड और कोवैक्सीन का टीका लग चुका है लेकिन अभी 125 करोड़ लोगों तक पहुँचना है, हर्ड इम्युनिटी के लिए आबादी के 60% लोगों में वैक्सीनेशन अनिवार्य है। इतने अधिक लोगों का कम समय टीकाकरण संभव नहीं है। दो गज दूरी, मास्क जरूरी में ढ़िलाई से कह रहे लोगों में नई कोरोना स्ट्रेन का विस्फोट हो रहा है। जैसे – जैसे टेस्ट बढ़ेगा मरीजों की संख्या में और भी वृद्धि होने का अनुमान है।

कोरोना विश्व के लिए बहुत बड़ा संकट और सबक है, चिंता उनके लिए सबसे अधिक है जो रोज कमाने वाले हैं जैसे छोटे दुकानदार, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी या दिहाड़ी मजदूर। लगातार उठती लाकडाउन की मांग ऐसे ही कुछ लोगों को अधिक चिंताग्रस्त कर दिया है जिससे उनमें डिप्रेशन बढ़ा है जिससे उनमें आगे चल कर आत्महत्यायें भी देखने को मिल सकती हैं।

पिछले वर्ष फोब्स की अमीरों की सूची देखने से पता चला कि कोरोना कुछ उघोगपतियों के लिए अवसर बन कर आया, उनकी सम्पत्ति में बड़ा इजाफा हुआ। नये – नये उधोगपति लिस्ट में शुमार किये गए।

लगता है कोरोना इलाज से अधिक अपनी गति से ही कमजोर पड़ेगा। लोगों को कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी। यह भी प्लेग, इन्फ्लूएंजा, फ्लू, चिकन पॉक्स और स्माल पॉक्स की तरह जीवित रहने वाला लगता है। लोगों को दो गज की दूरी और चेहरे पर मास्क की आदत डालनी पड़ेगी।

भारत विश्व के उन देशों में से रहा जिसने कोरोना के लिए जल्द ही लाकडाउन लगाया था (23 मार्च 2020) और इसके चेन को शुरू में ही बाधित करने का प्रयास किया गया परन्तु यह भी बहुत कारगर साबित नहीं हुआ। अभी कोरोना के संदर्भ और बहुत रिसर्च की जरूरत है।

नया स्ट्रेन लोगों में डर लेकर आया है, अस्पताल और श्मशान में कम पड़ती जगह लोगों को भयाक्रांत कर रही है, उन्हें भी लग रहा है कि इसका कोई कारगर इलाज फिलहाल के लिए नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि लोग कब तक घर में बैठें, संकट भी दो हैं एक तो कोरोना से डर का और दूसरे भूख का दोनों से एक साथ मध्यम और निम्न आय वर्ग का व्यक्ति कैसे लड़े? जबकि इसी वर्ग की संख्या देश में सर्वाधिक है।


नोट: प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।

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नोट: प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।
Note: The opinions expressed in this article are the author’s own and do not reflect the view of the संभाषण Team.

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