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Tuesday, May 11, 2021
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    विजयश्री

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    About Author

    Satyendra Tiwari
    Satyendra Tiwari
    न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।

    पढने में समय: < 1 मिनट

    हुंकार सुन

    फुंफकार सुन

    उसके गाण्डीव की

    टंकार सुन

    ***

    ध्वस्त किया जिसने

    हर जातीय व्यवस्था को

    विरोधियों के लिए

    उसकी हर ललकार सुन

    ***

    हर कौम का

    आशीर्वाद जिसपर

    हर कौम को

    जिसने मान दी

    ***

    है उत्ताप जिसके

    हर चाल में

    हर वार ही

    ब्रह्मास्त्र है

    लिख दी जिसने

    जीत की

    इबारत उसी से

    इबारत की

    तू दास्तान सुन

    ***

    विश्व की

    मानस पटल पर

    अमिट छाप है

    जिसने छोड़ दी

    देदीप्यमान इस

    नक्षत्र का

    चहूँ ओर

    हो रहा गुनगान सुन

    ***

    काल के उलट

    चाल में भी

    जो जीत निश्चित कर सके

    गौरव पताका हो

    जिसके नाम से

    उसके नाम का

    बखान सुन

    ***

    अब वोट कभी

    जब हो सके

    भय खाओ तुम

    उस शख्स से

    ***

    मोदी है

    जिसका नाम

    उसके नाम के

    प्रकोप से

    धमनियों में

    हो रहे रक्तचाप की

    आवाज सुन

    ***

    हुंकार सुन

    फुंफकार सुन

    उसके गाण्डीव की

    टंकार सुन

    ***

    – सत्येन्द्र तिवारी

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    Satyendra Tiwari
    Satyendra Tiwari
    न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।