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Tuesday, June 15, 2021
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    हिन्दू, धर्म या जीवन पद्धति?

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    एक विचार
    एक विचार
    स्वतंत्र लेखक, विचारक

    पढने में समय: 3 मिनट

    काफी समय से यह चर्चा और तर्क का मुद्दा बना हुआ है कि ‘हिन्दू’ या ‘हिंदुत्व’ एक ‘धर्म’ है अथवा एक ‘जीवन पद्धति’ है? तर्क का विषय इसलिए अधिक बन जाता है क्यों कि इन शब्दों के ठीक – ठीक अर्थ कम लोग समझते हैं और यदि ‘राजनितिक’ उद्देश्य हो तो कहना ही क्या? 

    इसे समझने के लिए हमें इन तीनों शब्दों को समझना आवश्यक है :

    1. हिन्दू
    2. धर्म,और
    3. जीवन पद्धति।

    1. हिन्दू : यहां हिन्दू से तात्पर्य ‘वैदिक सनातन धर्म’ से है। कालांतर से वैदिक सनातन धर्म को ही ‘हिन्दू धर्म’ नाम से संबोधित किया गया और सनातन धर्मी हिन्दू कहलाये। मात्र नाम बदलने से गुण-धर्म कैसे बदल जायेगा? नाम में आप कुछ भी कह लीजिये।

    रंगी को ‘नारंगी’ कहे, नकद माल को ‘खोया’।
    चलती को ‘गाड़ी’ कहे, दास कबीरा रोया ।।

    हिन्दू भावना या हिन्दू होने का भाव ‘हिन्दुत्व’ कहलाता है।

    2. धर्म : धर्म को समझने से पहले स्पष्ट कर दें कि ‘धर्म’ और अंग्रेजी भाषा के ‘Religion’ दोनों अलग – अलग अर्थ वाले शब्द हैं। अंग्रेजी में Religion का अर्थ मत, पंथ या सम्प्रदाय है। जबकि ‘धर्म’ का अर्थ इससे कहीं अधिक व्यापक है।
    धर्म एक संस्कृत शब्द है। ध + र् + म = धर्म। संस्कृत धातु ‘धृ’ – धारण करने वाला, पकड़ने वाला। ‘धारयति- इति धर्म:’ अर्थात जो धारण करने योग्य है, वही ध