31.1 C
New Delhi
Tuesday, June 15, 2021
More

    कर्म, भाग्य और ज्योतिष

    spot_img

    About Author

    एक विचार
    एक विचार
    स्वतंत्र लेखक, विचारक

    पढने में समय: 5 मिनटयह एक बड़े ही विचार का विषय है कि कर्म, भाग्य और ज्योतिष क्या है और एक मनुष्य के जीवन पर इनका क्या और कितना प्रभाव पड़ता है?

    सबसे पहले कर्म को समझते हैं,

    कर्म, मनुष्य का परमधर्म है, पूरी गीता ही निष्काम कर्म योग का शास्त्र है। गीता के अनुसार:

    न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् ।
    कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥

    अर्थात, बिना ज्ञान के केवल कर्म संन्यास मात्र से मनुष्य निष्कर्मतारूप सिद्धि को क्यों नहीं पाता इसका कारण जानने की इच्छा होने पर कहते हैं कोई भी मनुष्य कभी क्षण मात्र भी कर्म किये बिना नहीं रहता क्योंकि सभी प्राणी प्रकृति से उत्पन्न सत्त्व, रज और तम इन तीन गुणों द्वारा परवश हुए अवश्य ही कर्मों में प्रवृत्त कर दिये जाते हैं। [यहाँ सभी प्राणी के साथ अज्ञानी (शब्द) और जोड़ना चाहिये (अर्थात् सभी अज्ञानी प्राणी ऐसे पढ़ना चाहिये) क्योंकि आगे जो गुणों से विचलित नहीं किया जा सकता इस कथन से ज्ञानियों को अलग किया है] अतः अज्ञानियों के लिये ही कर्मयोग है, ज्ञानियोंके लिये नहीं। क्योंकि जो गुणों द्वारा विचलित नहीं किये जा सकते उन ज्ञानियों में स्वतः क्रिया का अभाव होने से उनके लिये कर्मयोग सम्भव नहीं है।

    वेद, उपनिषद और गीता, सभी कर्म को कर्तव्य मानते हुए इसके महत्व को बताते हैं।

    वेदों में ब्राह्मण, क्षत्रिय, शुद्र और वैश्य को कर्