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Monday, January 24, 2022

माँ की सीख

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Ankush Pandey
Ankush Pandey
सीखने के प्रयास में
पढने में समय: < 1 मिनट

अभी कैसे मैं रुक जाऊँ,
अभी तो राह अधबर है।

सीख माँ की याद आती,
लगता मुझको जब भी डर है। 

माथे पर हाथ रख कर,
कुछ यूँ था समझाया।

फिकर कैसी भी न करियो,
तेरे साथ रघुबर है।

(प्रेरक पंक्ति दिनेश रघुवंशी जी की रचित कविता है)

अस्वीकरण: प्रस्तुत लेख, लेखक/लेखिका के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो। उपयोग की गई चित्र/चित्रों की जिम्मेदारी भी लेखक/लेखिका स्वयं वहन करते/करती हैं।
Disclaimer: The opinions expressed in this article are the author’s own and do not reflect the views of the संभाषण Team. The author also bears the responsibility for the image/images used.

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