32 C
New Delhi
Monday, May 10, 2021
More

    सच कहना गुनाह तो नहीं?

    spot_img

    About Author

    Satyendra Tiwari
    Satyendra Tiwari
    न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।

    पढने में समय: < 1 मिनट

    सच मैं कहता हूँ

    तुम बगावती कह दो मुझे चाहे

    मैं होश में रहता हूँ

    मदहोश कह दो मुझे चाहे

    ***

    जब किसी तिरछी निगाहों से

    जमाना ठहर जाए उसी के आगे

    और आगोशित कर ले जमाने को

    वो तुफान के बाद आलम हो

    जिधर भी तुम देख लो चाहे

    ***

    जिसे परवाह न हो दुनिया की

    वो बिजलियाँ बेखौफ ही गिरा दे

    किसी के जान पे बन आए

    या किसी की मौत हो चाहे

    ***

    एक तो जिनकी शर्बती आंखों से

    बिजलियाँ कौध सी जाए

    उन्हें तो चिलमन भी झुकाना है

    जमाना बेहोश होता हो, तो हो चाहे

    ***

    जो झटक दे रेशमी जुल्फे

    घटा आंखों पे छा जाए

    ऐसी नाजनीन को क्या कहूँ

    कातिल जमाने का

    या खुदा कह दूँ उन्हें चाहे

    ***

    सच मै कहता हूँ

    तुम बगावती कह दो मुझे चाहे

    मैं होश में रहता हूँ

    मदहोश कह दो मुझे चाहे

    ***

    Written by – सत्येन्द्र तिवारी

    About Author

    Satyendra Tiwari
    Satyendra Tiwari
    न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।