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Tuesday, October 19, 2021

संभाषण में आपका स्वागत है!

मनुष्य के जीवन में विचारों का बड़ा महत्व है।

राम और रावण के बीच या देवता और दानव के बीच का अंतर भी केवल विचार ही हैं। वे विचार ही हैं जो मूलशंकर तिवारी को महर्षि दयानंद सरस्वती बनने पर विवश कर देते हैं। विचार करने के बाद ही डाकू रत्नाकर की विचारा-धारा बदल गई, वही रत्नाकर डाकू महर्षि बाल्मीकि बने और रामायण महाकाव्य के प्रथम रचयिता हुए।

विचार अच्छे या बुरे दोनों हो सकते हैं। विचारों की शक्ति इतनी प्रबल होती है कि देवता को राक्षस और राक्षस को देवता बना सकती है। अच्छे विचार आपके जीवन में उत्थान का कारक बनते हैं तो वहीं बुरे विचार पतन का कारण भी बनते हैं। विद्वानों का मत यह भी है कि विचार समस्या नहीं, बल्कि विचार की उत्पत्ति समस्या है लेकिन यहां हम मनुष्य की साधारण प्रकृति की ही बात करेंगे विचारों को मनुष्य से विरत करने की बात नहीं करेंगे।

यह वेबसाइट आपके विचारों को सबके सामने रखने की एक कोशिश के रूप में बनाई गई है। आपके विचार गद्य रूप में या पद्य रूप में हो सकते हैं। कहानी या वृतांत हो सकते हैं, कविता या गीत रूप में हो सकते हैं। यहां आप लिखेंगे भी और दूसरों को पढ़ेंगे भी। किसे पता किसके विचार किसीके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन ला दें।

अपने विचारों को सबके सामने रखने के लिए आपको संभाषण पर रजिस्ट्रेशन करना होगा उसके बाद Submit Post के लिंक पर जा कर आप लिख सकते हैं। छोटे विचार अथवा कविताओं (जिनमें शब्दों की अधिकतम संख्या 350 हो) माइक्रो-पोस्ट में और आर्टिकल पोस्ट (350 से अधिक शब्द) ब्लॉग पोस्ट के अंतर्गत प्रकाशित होंगी।


कृपया ध्यान दें:

  • आपके विचार किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाले न हों।
  • आप आपना व्यक्तिगत पता, ईमेल एड्रेस या फोन नम्बर न पोस्ट करें।
  • किसी के पोस्ट पर कॉमेंट करने के लिए मर्यादित शब्दों का प्रयोग करें तथा विचारों से असहमत होने की स्थिति में भी मर्यादित और नम्र भाषा में अपना पक्ष रखें।
  • किसी प्रचार अथवा स्पैमिंग संबधित पोस्ट न करें।
  • आपके पोस्ट आपके निजी विचार हैं तथा यह जरूरी नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।

यदि आप पोस्ट अथवा पोस्ट सबमिशन के बारे में किसी भी तरह की मदद चाहते हैं तो हमें लिखें।

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