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Tuesday, October 19, 2021

कशमकश

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Brajesh Rai
Brajesh Rai
Poem writing
पढने में समय: < 1 मिनट

यह तो अंदाज-ए-बयां था साहब, कि हमने दर्द को भी एक नाम दिया वरना आजकल तो लोग बेनाम हुए जाते हैं, कहते हैं… चेहरे को देखकर बड़ा सुकून मिलता है।

हमने तो दीवारों की जगह आईने लगा रखे हैं।

अंदाजा मोहब्बत का हमने किया बहुत देर से, वह दूर होते जाते हैं हम पास होते जाते हैं।

दूरियां मुकम्मल नाप के रखी हैं शायद, वो दर्द सुनाते हैं, हम तारीफ किए जाते हैं।

कितना लिखेगा तो अंदाज़ है मोहब्बत पर यह तेरे दर्द का फलसफा है ना कि तेरी जुस्तजू है।

ले आती है किस्मत तो तारीफ कर घुसने वालों को काली रात मिला करती है।

नाराज हैं हम पर, उन्हें पता नहीं… कहते हैं वक्त के साथ दूर हो जाएंगी, पर यह कैसी कैफियत है? कमबख्त! न दूर होती है ना पास होती है।

चलो बात करते हैं प्यास की, पानी पीने से दोस्ती है पर यह पानी कैसा है? ना प्यास बुझती है ना प्यास लगती है।


***

नोट: प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।
Note: The opinions expressed in this article are the author’s own and do not reflect the view of the संभाषण Team.

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