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Tuesday, October 19, 2021

द्रोपदी की पुकार

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Ankush Pandey
Ankush Pandey
सीखने के प्रयास में
पढने में समय: < 1 मिनट

हरे कृष्ण आओ कृष्ण आओ कृष्ण मेरे कृष्ण, सभा बीच में जब द्रोपदी पुकारी है।
कहां जा छुपे हो बता दो मनमोहना, ये नीच दु:शासन खींचन लागो मेरी साड़ी है।।

चीर बन के फिर गए द्रोपदी के चारों ओर, वही कहते जिन्हे बांके बिहारी हैं।
जाकी रक्षा को आयो खुद चार भुजा वालो, कहा कर सकेगौ जो दो ही भुजाधारी हैं।।

मैंने आगे कल्पना की, अगर द्रोपदी श्री राम के स्वरुप को मदद के लिए पुकारतीं
तो क्या भाव हो सकते थे :

दीनदयाल विरद संभारि रामा, ग्रंथों की लिखी क्या ये रीत न निभाओगे।
पांच पतियों की प्रिया पंचों बिच लुट रही, मर्यादा का क्या ये मर्दन देख पाओगे।।

पापिन ही सही गर दंड मोहे मिल रहो, पर तुम पतित पावन फिर कैसे कहाओगे।
तुम्हरी न सही पर काहू की तो हूँ मैं सिया, मोहे बचाने को मेरे राम नहीं आओगे?


pic credit: from internet
***

नोट: प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।
Note: The opinions expressed in this article are the author’s own and do not reflect the view of the संभाषण Team.

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Ankush Pandey
Ankush Pandey
सीखने के प्रयास में

13 COMMENTS

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Kapila
Kapila
6 days ago

हृदय स्पर्शी पंक्तियाँ 🙏🏻

Manjula
Manjula
1 month ago

आखिरी पंक्ति तो कमाल की है।

Amrita Gupta
Amrita Gupta
6 months ago

बहुत सुन्दर भाव है 👌

Aditya Gajpati
Aditya Gajpati
6 months ago

Bahut sundar

Donald Trump
Donald Trump
6 months ago

अदभुत

Joe biden
Joe biden
6 months ago

हृदय स्पर्शी पत्तियाँ🙏🙏

वीरेंद्र नारायण
वीरेंद्र नारायण
7 months ago

वाह, सुंदर भाव से परिपूर्ण कविता है।
धन्यवाद 🙏🙏

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