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Tuesday, October 19, 2021

माँ की ममता

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About Author

Satyendra Tiwari
Satyendra Tiwari
न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।
पढने में समय: < 1 मिनट

 मां! तुझ सा

इस धरती पर,

जिन्दा भगवान नहीं देखा

***

वात्सल्य, करूणा

अनुराग से उत्पल्वित

मैं तुझ सा

जलधाम नहीं देखा,

 मां! तुझ सा

इस धरती पर

जिन्दा भगवान नहीं देखा

***

इस फरेब की दुनियां में

मतलबी पसमंजर ही देखा,

पर तुझ सा

स्नेह का सुख सदन

ममता की मंजूषा,

शांति का

शिविर नहीं देखा,

 मां! तुझ सा

इस धरती पर

जिन्दा भगवान नहीं देखा

***

चोट लगे मुझको

और दर्द तुम्हें हो,

भूख लगे मुझको

और तड़प तुम्हें हो,

तेरी चरणों में

धरती आसमां को मिलते देखा,

 मां! तुझ सा

इस धरती पर

जिन्दा भगवान नहीं देखा

***

मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Dedicated to all mothers of the world including my mother!

 

नोट: प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।
Note: The opinions expressed in this article are the author’s own and do not reflect the view of the संभाषण Team.

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न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।
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