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Tuesday, June 15, 2021
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    राघवयादवीयम् – ‘अनुलोम-विलोम काव्य’

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    Satyendra Tiwari
    Satyendra Tiwari
    न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।

    पढने में समय: 13 मिनटएक ग्रंथ ऐसा भी है हमारे सनातन धर्म में जिसे भारत के सात आश्चर्यों में से पहला आश्चर्य ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी आश्चर्यों में सर्वश्रेष्ठ माना जाना चाहिए। यह दक्षिण भारत के श्रीमान् वेंकटाध्वरि द्वारा रचित ग्रन्थ “राघवयादवीयम्” है। इस ग्रंथ के श्लोकों के शब्दों को सीधा पढ़ने पर प्रभु श्री राम जी की कथा और उल्टा पढ़ने पर प्रभु श्री कृष्ण जी की कथा बन जाती है। इस आलौकिक ग्रंथ के मूल कुल 30 श्लोकों और उल्टा करने पर बने कुल 30 श्लोकों यानि इस प्रकार सभी 60 श्लोकों और उन सभी का अर्थ भी लिखने जा रहा हूँ।

    इस ग्रंथ के बारे में ज्यादा जानकारी मुझे नहीं है। किताब के शक्ल में कहाँ उपलब्ध है। यह भी मुझे नहीं पता है। लेकिन जितना पता है। उसे आगे लिखने की दुस्साहस