28.1 C
New Delhi
Tuesday, October 19, 2021

रहमत का सबब

spot_img

About Author

Satyendra Tiwari
Satyendra Tiwari
न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।
पढने में समय: < 1 मिनट

बा वफ़ा चरागों ने न की होती

रौशनी रौशन कभी न होती

शमा से कोई तो पूछो

आंधियों ने दिए हैं कितने जख्म

बेचारी जल भी कहाँ पाती

ग़र मंजूर ए खुदा न होता

***

ख़ैर है ख़ुदा की रहमत बख्श दी उसने

शब ए गम में भी एक खुशी है

कि वो महफूज़ है कहीं भी

वर्ना जिस्म मेरा बेजान भी न होता

***

राज ए रंग ए हिना राज ही रह जाती

वो अहसान फरामोश ग़र न होती

कोई नासमझ तिवारी शायर भी न होता

***

Written by — सत्येन्द्र  तिवारी

नोट: प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।
Note: The opinions expressed in this article are the author’s own and do not reflect the view of the संभाषण Team.

About Author

Satyendra Tiwari
Satyendra Tiwari
न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

कुछ लोकप्रिय लेख

कुछ रोचक लेख

Subscribe to our Newsletter
error: