अथातो शक्तिजिज्ञासा

प्रत्येक प्राणी के हृदय में जन्म से ही असंख्य वृत्तियाँ विद्यमान रहती हैं किन्तु उनमें ‘जिज्ञासा’ नामक वृत्ति को बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस वृत्ति के बिना प्राणी का जीवन निरर्थक ही रहता है। इसी वृत्ति के कारण…

प्रत्येक प्राणी के हृदय में जन्म से ही असंख्य वृत्तियाँ विद्यमान रहती हैं किन्तु उनमें ‘जिज्ञासा’ नामक वृत्ति को बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस वृत्ति के बिना प्राणी का जीवन निरर्थक ही रहता है। इसी वृत्ति के कारण…

"दायित्व" और "पुण्य" इन दोनों को सुचारू रूप से करना ही "धर्म" कहलाता है। आप धार्मिक तभी हो सकते हैं जब अपने 'दायित्व' और 'पुण्य', इन दोनों कर्मों को ठीक-ठीक समझें और उनका निर्वहन करें।

हिन्दू धर्म में श्रावण मास का बहुत महत्व है। संपूर्ण माह व्रत और महत्वपूर्ण परिवर्तनों का माह माना गया है। इस मास से ही चतुर्मास का प्रारंभ होता है जो व्रत, पूजा, ध्यान और साधना का काल माना गया है।

भगवान शिव के इष्ट हैं विष्णु। जब विष्णुजी ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया तो अपने इष्ट के बाल रूप के दर्शन और उनकी लीला को देखने के लिए शिवजी ने जोगी रूप बनाया।

तांबे के बर्तन में चरणामृत रूपी जल रखने से उसमें तांबे के औषधीय गुण आ जाते हैं। चरणामृत में तुलसीदल, तिल और दूसरे औषधीय तत्व मिले होते हैं। मंदिर या घर में तांबे के लोटे में तुलसी मिला जल रखते हैं।

यदि आप से पूछा जाय सबसे प्राचीन, शाश्वत और जीवंत धर्म कौन सा है? आप का ध्यान बरबस ही सनातन धर्म की ओर जायेगा। फिर प्रश्न उठता है सनातन धर्म ही क्यों? अन्य बहुत से धर्म, मजहब हैं, वह क्यों…

जब से धर्म का राजनीतिकरण हुआ है तब से यह बड़ा ही ज्वलंत प्रश्न बना हुआ है। आर्यसमाज आदि मत की बात ही क्या करें सनातनी भी इस पर एकमत नहीं होते। धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी का विचार था…

महाभारत में ऐसे अनेक पात्र हैं, जिनके बारे में लोग कम ही जानते हैं। ऐसा ही एक पात्र है भीम का पुत्र घटोत्कच। अधिकांश लोग ये जानते हैं कि घटोत्कच भीम व राक्षसी हिडिंबा का पुत्र था और उसकी मृत्यु कर्ण के हाथों हुई थी।

आरती एक विज्ञान है। आरती के साथ – साथ ढोल, नगाड़े, तुरही, शंख, घंटा आदि वाद्य भी बजते हैं। इन वाद्यों की ध्वनि से रोगाणुओं का नाश होता है।

स्वस्तिक मंगल चिन्हों में सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्राप्त है और पूरे विश्व में इसे सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत माना जाता है। इसी कारण किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले स्वस्तिक का चिन्ह बनाया जाता है