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Saturday, December 3, 2022

नसीहत मोदी सरकार को

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Satyendra Tiwari
Satyendra Tiwari
न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।
पढने में समय: < 1 मिनट

गर वो नहीं बदले

तो ये जमाना

जो खुद ही बदल जाएगा

मिली थी

जो ये दौलत की चाबी

ताला तो होगा

पर चाबी स्वत: ही बदल जाएगा

***

चलो तुम संभल कर

है जमाना खराब

बूरी नजरें हैं तुम पर

वो नजरें इनायत

न होगी कभी

बल्कि तुम्हारे नीचे की मिट्टी

खिसक जाएगा

***

कल हम न रहेंगे

ये जमाना रहेगा

सिर्फ वही रहेंगे

और इस जमाने का सुरताल

ऐसा न होगा

बजाओगे रामधुन

बिस्मिल्ला निकलेगा

***

जिनके नजरों के आगे

तुम्ही बसे हो

पर नजरें तुम्हारी

है उनका दीवाना

कहीं ऐसा न हो की

न हो दीदार ए मुहब्बत

और कहीं इधर का भी

मौसम बदल जाएगा

***

है टिकाऊ मोहब्बत

वही सदियों से जिसमें

आग दोनों तरफ

बराबर लगी हो

एक तरफा मोहब्बत

जिसने भी किया है

तय है उसकी कश्ती

बीच भंवर में ही डूब जाएगा

***

हमें क्या है हम तो

कल भी थे जालिम

और ये जालिमाना अंदाज

आज भी है मेरा

इसे मानो न मानो

कहना है मेरा काम

पर मुक्कद्दर तुम्हारा

बिखर जाएगा।

***

मुहाफ़िज़ तुम्हारा

वो कभी भी न थे

उन्हें शाही सर पे चढा़ओ

ये गंवारा किसी को

हरगिज़ न होगा

जो हमदम तुम्हारे

उसे पहचानो

वर्ना रुखसत तुम्हारा हो जाएगा

***

गर वो नहीं बदले

तो ये जमाना

जो खुद ही बदल जाएगा

मिली थी

जो ये दौलत की चाबी

ताला तो होगा

पर चाबी स्वत: ही बदल जाएगा

***

अस्वीकरण: प्रस्तुत लेख, लेखक/लेखिका के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो। उपयोग की गई चित्र/चित्रों की जिम्मेदारी भी लेखक/लेखिका स्वयं वहन करते/करती हैं।
Disclaimer: The opinions expressed in this article are the author’s own and do not reflect the views of the संभाषण Team. The author also bears the responsibility for the image/images used.

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Satyendra Tiwari
न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।

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3 years ago

बड़े भाई, नमस्ते। खुश हूं देख कर की आप किसी भी भावना को आशु कविता में रूपांतरण कर देने का क्षमता रखते हैं। सरल शब्द है, पर गभीर भावपूर्ण मर्मार्थ– बहुत अच्छा लगा। मोदीजी के लिए दिन रात एक कर दिए थे आप, आप का जरूर अधिकार तो बनता है नसीहत देने का; चाहे कटु-तिक्त हो या मधुर। धन्यबाद।

Kamal Mohan
Kamal Mohan
3 years ago

वाह, भाई साहब आपने एकदम सही बात कविता के माध्यम से कही है। 👌👌
मोदी जी ने वर्तमान कार्यकाल की शुरुवात जिस प्रकार से की है उसे देख कर यही लगता है कि या तो यह कोई बड़ी सोच है या फिर वही तुष्टिकरण की घिसीपिटी राजनीति।
जो भी हो हमें (जनता को) समय समय पर सरकार को नसीहतें जरूर देनी चाहिए।
धन्यवाद 🌷🌷

Kamal Mohan
Kamal Mohan
Reply to  Satyendra Kumar Tiwari
3 years ago

भाई साहब, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हमें तो वही दिखता है जो कार्य वो करते हैं। जो नहीं किया उसके बारे में हमें कैसे पता होगा, हमसे पूछ कर तो वो कुछ करते नहीं हैं। केवल विश्वास के नाम पर शांत रहने को कैसे सही कह सकते हैं। जो ठीक लगे उसका स्वागत और जो नहीं सही उसका विरोध करना ही लोकतंत्र है। सरकार को सुझाव देना एक जागरूक नागरिक की मुख्य भूमिका… Read more »

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न कविवर हूँ न शायर हूँ। बस थोड़ा-बहुत लिखा करता हूँ। मन में आए भावों को, कभी गद्य तो कभी पद्य में व्यक्त किया करता हूँ।

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