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Monday, January 24, 2022

काम की अनंत इच्छाएं

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Dhananjay Gangay
Dhananjay Gangay
Journalist, Thinker, Motivational speaker, Writer, Astrologer🚩🚩
पढने में समय: 2 मिनट

रिश्ते का आधार प्रेम और सदभाव होता है, उसकी मर्यादा समाज के नियमन के अंतर्गत होती है।

मनुष्य की यात्रा और कुछ रिश्तों की ही कहानी है,
कभी इश्क तो कभी जंग मानव की निशानी है।

मनुष्य की यात्रा स्त्री पुरुष के सहजीवन के साथ शुरू हुई। दोनों के रिश्ते का आधार काम को मर्यादित ढंग से शांत करना और संतान के माध्यम से सृष्टि को गति देना था। 21वीं सदी का विश्व रिश्तों को लेकर नई अंगड़ाई ले रहा है। समलैंगिक, लेस्बियन, गे, ट्रांसजेंडर के साथ साथ पालीएमरस रिश्ते की बात हो रही है।

पालीएमरस दो शब्द पाली और एमरस से बना है लैटिन और ग्रीक शब्द जिसका अर्थ है एक समय मे एक से अधिक से प्रेम का रिश्ता, जैसे एक लड़की के एक समय तीन या चार पुरुष से प्रेम के साथ शारीरिक संबंध जिसकी जानकारी अन्य प्रेमी को भी रहे। विकृति को मानवाधिकार कैसे घोषित किया जा सकता है? मानवाधिकार की सीमा में स्वतंत्रता का आधार इतिहास के आधार पर ही प्राप्त होता है।

रिश्ते के दो आधार होते हैं, एक प्राकृतिक दूसरा नैतिक। इस आधार पर इन रिश्तों को देखें तो दोनों का उल्लंघन है। कुछ लोगों की इच्छा से न समाज चलता है, न कानूनी मान्यता मिलती है।

यदि आज हम इस विकृति पर रोक नहीं लगाये तो जल्द ही कुछ लोगों की टोली सड़क और कोर्ट में पशुओं से सम्बन्ध बनाने को अपने अधिकार सीमा कहेगी। पिछले दिनों एक महिला लोगों से पूछ रही थी कि उसे कोई देश बताये जहाँ वह अपने बेटे के साथ संबंध बना सके।

विश्व युद्ध के बाद की पीढ़ी ने 70 के दशक में अमेरिका में सेक्स फ्री समाज बनाया, लोग घर से भाग कर उस समाज मे पहुँच जाते कई दिन तक पेड़ पर, तालाब के किनारे सड़क पर जोड़े नंगे लेटे रहते, लोगों के सामने सम्बन्ध बनाते। कहते, ये तो अधिकार की बात है। इसके बाद जब बच्चे पैदा हो गये तब जिम्मेदारी, तो समुदाय छोड़ भाग गये।

एक बात हमें सदा याद रखनी है कि इस धरती पर जीवन प्रकृति के संतुलन का नाम है, प्रकृति अपना कानून भी लगाती है। जब व्यक्ति किसी से पराजित नहीं हो पाता उसे प्रकृति पराजित कर देती है। नेपोलियन और हिटलर के इतिहास से यह पता चलता है। आज के समय को लें तो अमेरिका जैसे देश भी प्रकृति के आगे रोज बौना हो रहा है।

यदि यह किसी भी तरह के मनुष्य के अधिकार हैं तो जानवरों के अधिकारों की बात कौन करेगा? क्या वह मानव के भोजन बनने और प्रयोग के लिए ही धरती पर आये है?

कभी-कभी तो पशुओं में मानव से अधिक मानवता दिखती है और मानव में पशुओं से अधिक पशुता दिखती है। जैसे, पशु को जब पता चलता है उसका पार्टनर गर्भ से है तो सम्बन्ध नहीं बनाता लेकिन मनुष्य जानने के कई महीने तक सम्बन्ध स्थापित करता है।

लोकतांत्रिक मूल्यों की बात की जाय तो कुछ लोगों की इच्छा को जन इच्छा पर थोपा नहीं जा सकता है। आधुनिक विज्ञान भी कहता है – अप्राकृतिक सम्बन्ध मनुष्य को जल्दी बीमार करेंगे। उन पर होने वाला खर्च समाज से टैक्स के रूप लिया जाएगा। नैतिकता के बगैर भी समाज का निर्माण हो सकता है। अब उदारवाद के नाम पर इसकी कवायद तेज है, बीमारियों को भी उच्च बौद्धिक वर्ग जस्टिफाई करने लगे हैं कि इसका भी चलन हो।


नोट: प्रस्तुत लेख, लेखक के निजी विचार हैं, यह आवश्यक नहीं कि संभाषण टीम इससे सहमत हो।

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