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Monday, May 10, 2021
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    श्रीराम मंदिर और बाबरी विवाद

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    Dhananjay Gangay
    Dhananjay Gangay
    Journalist, Thinker, Motivational speaker, Writer, Astrologer🚩🚩

    पढने में समय: 5 मिनटसुप्रीमकोर्ट के निर्णय पर 5 अगस्त 2020 से मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। इसी श्रीराम मंदिर के लिए हिंदुओ ने पिछले 500 वर्ष तक संघर्ष किया। कुल 36 युद्ध लड़े गए जिसमें लगभग 1 लाख से अधिक हिन्दू वीरगति को प्राप्त हुये।

    मंदिर के इतिहास में हिंदुओं के रक्त से कई बार अयोध्या लाल हुई है। आखिरी बार 1990 में मुलायम सिंह द्वारा कारसेवकों पर गोली चलवा कर लाल किया था, यह गोली जमीन से लेकर हवा में हेलीकॉप्टर से चलायी गई। हिन्दू जमीन पर खून से लथपथ जरूर गिरा लेकिन उसकी दृढ़ता खड़ी रही जो अब जाकर साकार हो रही है।

    सुप्रीमकोर्ट में मुस्लिम पक्षकार ने एक बार कहा कि राम चबूतरा था, फिर कहा नहीं था। बाबरी ढांचे के लिए पक्षकार ने कहा कि यह ईदगाह पर बनी थी, अगले दिन कहा कि यह समतल मैदान पर बनी थी। कोर्ट में बाबरी पक्षकार सिर्फ खीझ दिखाते रहे, सबूत कपोल-कल्पित ही रहे। अयोध्या से मुस्लिम का क्या काम? वह तो विवाद के लिए था।

    कोर्ट में कहा गया कि बाबर ने कोई मंदिर नहीं तोड़ा था। जिस जगह बाबरी ढांचा खड़ा था उस जगह से हिंदुओं का कोई सरोकार नहीं है। 1949 में गर्भगृह में रामलला के प्राकट्य से यह स्पष्ट हो गया कि रामजी की जन्मभूमि यही है जिसका सबूत उस समय तैनात मुस्लिम सिपाही ने भी दिया।

    स्वतंत्रता के बाद सत्ता काले अंग्रेजों को मिली, जिसकी धर्म में आस्था नहीं थी। वह अंग्रेजों की लम्बरदारी में ही गर्व महसूस करता था।

    जब देश का बटवारा धर्म के आधार पर हो गया तो मुस्लिमों को देश में रोकने का औचित्य नहीं रह गया था, तब सेकुलरिज्म का छद्म विचार धारण करने की क्या जरूरत थी? सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस्लाम का सम्बंध अयोध्या, मथुरा, काशी, उज्जयनी, सोमनाथ आदि से क्या था?

    इतिहास में दर्ज बर्बर मुस्लिमों के आक्रमण जिसमे मंदिर तोड़े गये महिलाओं की अस्मत को तार-तार किया गया, इसके बावजूद पूरे मध्यकालीन इतिहास में अरबी, गुलाम और मुगल ही हावी रहे हैं, उनके चरित्र को गढ़ने में सेकुलरिज्म शासन और इतिहासकार की महती भूमिका रही है।

    तुर्की का 1500 साल पुराना हागिया सोफिया जो मूलरूप से चर्च था, मस्जिद बना फिर लाइब्रेरी अब दुबारा मस्जिद बना दिया गया। यह है इस्लामिक देशों की हकीकत। मुस्लिम की सेकुलरिज्म अब कहा गयी? इसी तुर्की के खलीफा के लिए 1920 में खिलाफत आंदोलन भारतीय मुस्लिमों ने चलाया था। यह दूसरे के मंदिर, चर्च में मीनार बना और थोड़ा बहुत परिवर्तन करके इसे अल्लाह के इबादत का स्थल घोषित कर लेते हैं।

    इराक के पूर्व मुस्लिम तानाशाह सद्दाम हुसैन ने कहा था कि जहाँ तक मैं जानता हूँ भारत के ईमाम, अल्लाह ‘राम’ हैं जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं। भारतीय मुस्लिम रामजन्मभूमि पर नाहक विवाद पैदा कर रहा है। जो कुरान के रास्ते से भी अलग है। कुरान कहती है कि विवादित स्थल पर की गयी इबादत को अल्लाह स्वीकार नहीं करता है।

    भारत का मुस्लिम सेकुलरिज्म का हिमायती है वह भी हिन्दू की कीमत पर। यदि सेकुलरिज्म और भाई चारे की उसे जरा भी परवाह होती तो वह गलती स्वीकार करता और बड़ा ह्रदय दिखाकर अयोध्या, मथुरा, काशी आदि पर अपना दावा छोड़ देता।

    सुप्रीमकोर्ट ने जो निर्णय दिया उसमें पांच न्यायाधीश में एक मुस्लिम अब्दुल नजीर थे इन्होंने भी सर्वसहमति से अपना मत भी हिंदुओं के मंदिर के पक्ष में दिया।

    2003 के विवादित स्थल से खुदाई करा कर पुरातत्वविदों द्वारा इकट्ठा किये गए अवशेषों ने भी मंदिर की पुष्टि की है।

    सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद भूमि के समतलीकरण में प्राप्त पुरातात्विक अवशेष हिंदु स्थापत्यकला निर्माण, कमलपुष्प, आमलक, 9 फीट शिवलिंग आदि के मिलने से रोमिला थापर, हबीब जैसे इतिहासकारों की हकीकत को उजागर करते हुए मंदिर होने के साक्ष्य की पुष्टि की।

    राममंदिर का बनना वामपंथियों की सबसे बड़ी पराजय है। उन्होंने मुस्लिम पक्ष की जगह बौद्ध तथ्य को इसमें शामिल करने का प्रयास किया। साकेत नगरी, सम्राट अशोक के स्तंभ से शिवलिंग की साम्यता आदि-आदि। कुछ नहीं मिला तो तिथि विवाद, करोना संक्रमण के गाइडलाइंस पर सुप्रीम दौड़े जहाँ से भगा दिया गया।

    बाबरी की वास्तविकता भारतीय मुस्लिमों को भी पता है, किन्तु वह कोई सेकुलर नहीं हैं, यह एक मजहबी कट्टरपंथी समुदाय है जिसमें जो मौलवियों ने कह दिया, वही इस्लामिक आईन बन जाता है।

    यदि विवाद को खत्म किया जाना होता तो जिस समय देश को स्वतंत्रता मिली, देश धर्म के नाम पर बट चुका था। इस्लाम के पैरोकार मार-काट, दंगो पर आधारित रक्तरंजित पाकिस्तान ले चुके थे। उसी समय अयोध्या, मथुरा, काशी मंदिर का प्रस्ताव संसद में पास कर मंदिर बना दिया जाता।

    लेकिन सेकुलरिज्म के हिमायती तो तब सोमनाथ मंदि