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Tuesday, June 15, 2021
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    गांधी जी की बंदूक

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    Dhananjay Gangay
    Dhananjay Gangay
    Journalist, Thinker, Motivational speaker, Writer, Astrologer🚩🚩

    पढने में समय: 3 मिनटआज स्वप्न में गांधी जी से मुलाकात हुई, बहुत सी बातें उन्होंने बताई लेकिन कौतूहल का विषय यह हुआ जब उन्होंने कहा कि प्रयागराज के जिला कलक्टर से मेरी बात हुई है, तुम जा कर एक रायफल और एक रिवॉल्वर ला के मुझे दो, जिसके लाइसेंस का आवेदन मैंने पहले ही कर दिया था।

    मैंने कहा : गांधी जी और बंदूक?

    उन्होंने कहा : आज की दुनिया में सुरक्षा और हनक जरूरी है। वैसे भी मांसाहारी अहिंसक कैसे हो सकते हैं? दूसरे जीव को खाने की भावना ही तो हिंसक बनाती है, दूसरे दुष्परिणाम हैं, कुंठा और अवसाद!

    जिस तेजी से भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में अहमकेन्द्रिता बढ़ रही है, वह असहिष्णुता को बढ़ा रही है। कोई किसी को भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। न पत्नी पति को, न सन्तान माता – पिता को, बाकी अन्य की बातें सिर्फ दूसरों को मूर्ख बनाने के लिए ही हैं।

    गांधी जी : मेरा अहिंसा का सिद्धांत तो मेरे ही समय में बहुत सफल नही हो पाया। मैंने हिंदू – मुस्लिम को एक करने की बहुत कोशिशें की किंतु स्वार्थ परवान लिया देश टुकड़ों में बटा। हिंसा सब पर हावी हुई, हिंदू – मुस्लिम एक दूसरे के रक्त के प्यासे हो गये, मेरे ही शिष्य मेरी अवहेलना करने लगे। मैं देखता रहा और लाशों की गंध के बीच सीमायें बन गयी।

    अब मैं देखता हूं कि इसमें दोष किसका था? हिंदू – मुस्लिम के बीच की गहरी खाई को गांधी भर नहीं पाया। मुस्लिमों का भारत में रक्त रंजित इतिहास, मंदिर और महिलाओं के साथ किये गये दुर्व्यवहार, जिसके लिए आज भी भारत के मुस्लिम, हिंदुओं से गलती मानना तो दूर, वह उन्ही बर्बरों को आदर्श मानते हैं।

    एक समस्या यह भी रही कि मुस्लिमों के लिए व्यक्ति गौण है, उनके लिय