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Tuesday, June 15, 2021
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    नारी का शास्त्र

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    Dhananjay Gangay
    Dhananjay Gangay
    Journalist, Thinker, Motivational speaker, Writer, Astrologer🚩🚩

    पढने में समय: 2 मिनटधर्म के नाम पर विश्व मे बहुत खून बहे। स्त्री के लिए अलग कानून बनाया गया। उन पर चुड़ैल का आरोप लगा फाँसी पर टांग दिया गया या जला दिया गया।

    भारतीय संस्कृति इनसे भिन्न है गो, ब्राह्मण, और कन्या को भोजन करा के उसे नारायण तक पहुँचा दिया जाता है। कन्या के पैर धोये और छुये जाते है। पिता जिसे जन्म दिया उससे आशीर्वाद लेता है बड़ा भाई छोटी बहन के पैर छूता।
    धर्म के लिये विश्वभर में कत्लेआम हुआ। जिस चीज को लेकर नारियां आलोचना करती है वही नारी के सम्मान के लिए रामायण और महाभारत कर दी। वही जिन्हें हम राम और कृष्ण के रूप में पूजते है।

    यदि आप हिन्दू धर्म मानते है तो हिन्दू विधियों का पालन करना होगा। स्वैच्छाचारिता नहीं चलेगी।
    कभी कभी स्त्री के सती होने का साक्ष्य मिलता है पहला महाभारत में पांडु की पत्नी माद्री का दूसरा गुप्त वंश के ऐरण अभिलेख से भी सती का साक्ष्य मिलता है बाद में कुछ छुटपुट घटनाएं देखने को भी मिलती है।

    सती जिसे प्रथा का नाम दिया गया जिसके लिए राजा राममोहन राय को अंग्रेजो ने मोहरा बना कर भारतीय संस्कृति पर हमला किया। संस्कृति पर प्रहार इस लिए किया जाता है जिससे आपकी प्रेरणा को तोड़ कर दिग्भ्रमित कर अपने को श्रेष्ठ सिद्ध किया जा सके।

    सती होने स्त्री की स्वेच्छा थी जोर जबरदस्ती नहीं। सुलोचना के सती होने का साक्ष्य मिलता है तो कौशल्या, कैकेई, सुमित्रा और मंदोदरी के जीवित रहने का साक्ष्य है। जो यह समझती है कि ये जो मेरे पति मृत्युशैय्या पर पड़े है इनके वैगेर तो मेरा जीवन ही नहीं। क्योंकि जीवन और मृत्यु दोनों