मृत्यु से मुलाकात

मृत्यु से मुलाकात

हमें अपनी प्राथमिकता बदलनी पड़ेगी, विकास प्रकृति में निहित है जिसे हमें संवहनीय तरीके से अर्जित करना है। जितनी भूमि, वायु या जल है, यह सभी की है। प्रकृति के साथ संतुलन बैठाने में ही मानव की भलाई है नहीं…

प्रकृति की पीड़ा – कोरोना

प्रकृति की पीड़ा कोरोना

कोरोना की जद मानव जीवन तक पहुंच गयी है, गवाह श्मशान के उठते धुंए, कब्रिस्तान पर उमड़ती भीड़ है। किसकी बारी कब यह कहना मुश्किल है। अस्पताल, बेड, ऑक्सीजन, इंजेक्शन, श्मशान सब कम पड़ते जा रहे हैं। हालात यह है…

साम्प्रदायिक गांधी

साम्प्रदायिक गांधी

गांधी जी ऐसे नेता थे जो हिन्दू राजनीति के मुखिया होने के साथ – साथ मुस्लिमों के भी सिरमौर बनना चाहते थे। वैसे तो गांधी का भारतीय राजनीति में प्रवेश 1901 इस्वी में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन से हुआ था…

कोरोना की कराह

कोरोना की कराह

Covid-19 वैक्सीन की खोज के साथ सभी खुश थे कि इस महामारी पर मानव को विजय वैजयंती मिल गयी है लेकिन तुम डाल – डाल तो कोरोना पात – पात वह निरन्तर अपने में उत्परिवर्तन (Mutation) करके इस बार और…

उपासना स्थल अधिनियम 1991 और कांग्रेस

उपासना स्थल अधिनियम 1991 और कांग्रेस

1992 इस्वी में केंद्र में नरसिंहा राव की सरकार ने अयोध्या विवाद के आलोक में उपासना स्थल अधिनियम पास किया। इस अधिनियम के तहत हिंदू धर्म स्थलों पर मुस्लिम कब्जे को संवैधानिक मान्यता दी गयी। इस अधिनियम के अनुसार 15…

नैरेटिव का महत्व

नैरेटिव का महत्व

भारत में एजेंडावादी लोग बहुत प्राचीन समय से रहे हैं। उनका एक ही ध्येय रहा है कि कैसे भी करके सत्ता मिल जाये। दलित, अल्प संख्यक, पिछड़ा, आरक्षण उसी के हथकंडे हैं। लोकतंत्र खत्म कर दीजिए यह एजेंडे स्वयं समाप्त…

पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार?

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार? किसकी सरकार, कितने सीटों से और क्यों बनेगा? पूरा विश्लेषण : पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव 2021, जो कुल 294 सीटों के लिए आठ चरणों में सम्पन्न होना है। जिसका अभी तक दो चरण सम्पन्न…

डाकोर का इतिहास

डाकोर का इतिहास

भक्तमाल में इसका वर्णन है। श्रीकृष्ण का एक नाम रणछोड़ भी है और वो द्वारकाधीश से डाकोर भागे थे। विजय सिंह नाम के परम भक्त डाकोर में रहते थे और साल में 2 बार तुलसी जी को अपने सर पर…

अफ्रीका : दो ध्रूवों की प्रयोगशाला

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अफ्रीका, एक ऐसा खूबसूरत महादीप है जिसे प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है लेकिन यूरोप, एशिया और अमेरिका की गिद्ध दृष्टि से बच नहीं पाया। अफ्रीका प्राचीन समय से एक सनातन परंपरा संपन्न महाद्वीप रहा है जिसे अपनी मान्यताओं के…

जल बिना जीवन

जल बिना जीवन

पंच महाभूतों में जल तत्व सबसे महत्वपूर्ण और भारी है, इसके बिना ग्रह तो हो सकता है लेकिन उसपर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। धरती पर जल लगभग 71 प्रतिशत है जिसमें से पीने योग्य मात्र 3 प्रतिशत…