भारत की लूट

भारत की लूट

भारत में 45 ट्रिलियन डॉलर (₹3,19,29,75,00,00,00,000.50/-) की लूट अंग्रेजों द्वारा अंग्रेजी शासन में की गई। भारत के दलित चिंतक ज्योतिबा फुले, पेरियार, भीमराव अंबेडकर के लिए विषय दलित था, अर्थव्यवस्था क्यों नहीं? षड्यंत्र बू नहीं आती आपको! शुद्र को दलित…

सांस्कृतिक मूल्य और नारी

सांस्कृतिक मूल्य और नारी

भारत, सांस्कृतिक परम्पराओं और मूल्यों का निर्वहन करने वाला देश है। विश्व में भारत की विशेष पहचान है। भारत विश्व में विशिष्ट विशेषताओं यथा सहनशीलता, उदारता, अतिथि सेवा की विशेष परम्परा के कारण प्रसिद्ध है। भारत की संस्कृति को नष्ट…

अन्धानुकरण

अन्धानुकरण

भारतीय समाज पर स्पष्ट रूप से अमेरिकी – यूरो संस्कृति हावी हो गयी है। अब यह अंधानुकरण शहरों तक सीमित न रह कर गांवों के घरों में घुस चुका है। हमारे बच्चे कपड़े, बाल और रहन – सहन से लगभग…

आयुर्वेद vs एलोपैथी

आयुर्वेद vs एलोपैथी

कोरोना काल में एलोपैथी और आयुर्वेद की चर्चा लगभग आम है। आयुर्वेद कफ, वात और पित्त इन तीनों के असंतुलन को बीमारी का प्रमुख कारण मानता है। स्वस्थ्य रहने के लिए आयुर्वेद कहता है ऋतभुख, मितभुख और हितभुख आर्थत सात्विक…

कलयुग की प्रेमगाथा

कलयुग की प्रेमगाथा

यह समय अंग्रेजी वाले प्रेमियों (लवर) का चल रहा है। GF, BF के बाद प्रचलन में X (Ex) भी आ गया। मेरी X तेरा X, एक वायरस की तरह लवर का प्रचलन फैलता जा रहा है। चरित्र क्या होता है?…

वेद – ज्योतिर्मयी वाणी

वेद ज्योतिर्मयी वाणी

इदमन्धतमः कृत्स्नं जायेत भुवनत्रयम्। यदि शब्दाह्वयं ज्योतिरासंसारं न दीप्यते॥ – काव्यादर्श १.४ यह समूचा तीनों लोक घने अंधेरे में डूबा रहता, अगर ‘शब्द’ नामक ज्योति पूरी दुनियां में प्रदीप्त न रहती। सृष्टि से पूर्व केवल अंधकार ही था। तम आसीत्…

गांव चला शहर बनने

गांव चला शहर बनने

एक समय था जब किसी के घर पर बच्चा पैदा होने वाला होता था तो आस – पड़ोस से महिलाएं आ जाती थीं और बच्चा पैदा होने के बाद पूरा गांव बधाई देने आता था। मां के दूध नहीं होने…

स्त्री चरित्र

स्त्री चरित्र

नारी संस्कृति का आधार है, वह पुरुष को पशु से मनुष्य बना देती है। हे नारी! तुम ही श्रीराम का स्वभिमान थी और पाण्डवों की शान थी। भारत के ऋषियों को परम पद तक पहुँचाने में भी तुम्हारी महती भूमिका…

भारत की संस्कृति क्या है?

भारत की संस्कृति क्या है?

भारतीय संस्कृति क्या है, यह आज भी एक बहुत ही ज्वलंत विषय बना हुआ है। भारत में सदा से आस्तिक और नास्तिक रहे हैं और इसके साथ ही वाममार्गी भी अपने विचार को समाज में रोपित करने का प्रयास करते…

एक जरूरी माँग! अभी तक जहाँ किसी की नजर नहीं गई है। इसके लिए ज्यादा उम्मीद है कि मीडिया वाले दोषी हों। भारत के अस्मिता का सवाल है।

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एक छोटा सा लेख लिखने जा रहा हूँ। कृपया जरूर पढ़ें। कोरोना से निपटने में बदइंतज़ामी की तस्वीर, इससे मरने वाले लोगों की तस्वीर, सामुहिक दाहसंस्कार की तस्वीर और इससे चिखने चिल्लाने वाले एवं दारून दुख चिख चित्कार की तस्वीर…