मांसाहार, विनाश का द्वार

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द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च। दैवो विस्तरशः प्रोक्त आसुरं पार्थ मे श्रृणु।। – श्रीमद्भगवद्गीता १६/६ मनुष्य दो प्रकार के हैं– देवता और असुर। जिसके हृदय में दैवी सम्पत्ति कार्य करती है वह देवता है तथा जिसके हृदय में आसुरी…

महाबली भीम और हनुमान

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भगवान धर्म की कृपा से युधिष्ठिर का जन्म हुआ था उसके बाद महाराजा पाण्डु ने पृथा (कुंती) से कहा कि क्षत्रिय बल से ही बड़ा कहा जाता है अतः ऐसे पुत्र का वरण करो जो बल में सबसे श्रेष्ठ हो।…

भीम में कैसे आया १० हज़ार हाथियों का बल?

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पाण्डु पुत्र भीम के बारे में माना जाता है की उनमे दस हज़ार हाथियों का बल था जिसके चलते एक बार तो उन्होंने अकेले ही नर्मदा नदी का प्रवाह रोक दिया था। लेकिन भीम में यह दस हज़ार हाथियों का…

हिन्दू, धर्म या जीवन पद्धति?

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काफी समय से यह चर्चा और तर्क का मुद्दा बना हुआ है कि ‘हिन्दू’ या ‘हिंदुत्व’ एक ‘धर्म’ है अथवा एक ‘जीवन पद्धति’ है? तर्क का विषय इसलिए अधिक बन जाता है क्यों कि इन शब्दों के ठीक – ठीक…

हे कृष्ण! हे माधव!

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देख रहे हैं प्रभु संसार की हालत, कोरोना कहर के बीच चीनी घुसपैठ, मौसम कैसे लगातार रंग दिखा रहा है। जगन्नाथ जी के झंडे में आग लगने। भारतीय तटवर्ती क्षेत्र में लगातार तीन समुद्री तूफान, कई भूकम्प के झटके। अब…

श्री राम मंदिर और अयोध्या

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यूँ तो मंदिर के लिए सभी सोच के विचारक तरह – तरह के विचार दे रहे हैं। फलां को पूजन शामिल करिये, फलां ने ताला खुलवाया था, फलां ने बाबरी ढांचे को नष्ट होने दिया आदि – आदि। इनको मंचासीन…

श्रीराम मंदिर और बाबरी विवाद

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सुप्रीमकोर्ट के निर्णय पर 5 अगस्त 2020 से मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। इसी श्रीराम मंदिर के लिए हिंदुओ ने पिछले 500 वर्ष तक संघर्ष किया। कुल 36 युद्ध लड़े गए जिसमें लगभग 1 लाख से अधिक हिन्दू वीरगति को…

नागपंचमी क्यों मनाएं?

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84 लाख योनियों में मनुष्य योनि की तरह नाग योनि भी बहुत महत्वपूर्ण है। शेष नाग जिन्होंने धरती को धारण कर रखा है। वासुकी जी जो समुद्र मंथन में लुप्त हुई विशिष्टता को निकालने के क्रम में जब देव-दानव इकट्ठा…

बूढ़ी कांग्रेस की बूढ़ी सोच

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कांग्रेस पार्टी का एक समृद्धशाली इतिहास रहा है किन्तु आज की परिस्थितियों में उसके वयोवृद्ध नेताओं की कसरत ने उसे नेतृत्व विहीन बना दिया है। कांग्रेस के लिए “अंधा बाटे रेवड़ी फिर – फिर अपने देय” कहावत विल्कुल चरितार्थ है।…

सांस्कृतिक स्कंधावार और खोया भारत

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एक समय पूरी धरती भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत थी। जब तक शासन और नीतियां सनातनी परम्परा से चलती और बनती रहीं तब तक विश्व के कोने – कोने में भारतीय संस्कृति फली फूली। संस्कृति के विकास में स्थानीयता और परम्परा…