मुस्लिम मजहब की हकीकत

मुस्लिम मजहब की हकीकत

मुसलमानों का जो रुख है उससे तो यही लगता है एक दिन भारत ही नहीं बल्कि सभी ग़ैर मुस्लिम मुल्कों में वो आतंकवादी, बर्बर, कट्टरपंथी और हेय हो जाएंगे। लोग मुस्लिम नाम से भी नफरत करने लगेंगे। वह जहां भी…

सनातन संस्कृति की चोरी

सनातन संस्कृति की चोरी

सार्वभौमिक सनातन हिंदू धर्म शोर नहीं मचाता है बल्कि वह बौद्धिकता के कारण विकास पथ पर दृढ़ता के साथ चलता रहा है। वह अपने समय के इन्तजार में है, आज तक उसकी आध्यात्मिक शक्ति ही उसके मौलिक संस्कृतियों को बचा…

मानव और सत्ता का बाजार

मानव और सत्ता का बाजार

आप परेशान सत्ता और विपक्ष के लिए हैं वह आपको कोरोना दे गया। परिवार को तोड़ दिया, चार रोटी के लिए आप रेस्तरां पर निर्भर हो गये। हजारों मिठाइयों के बावजूद आप चाकलेट खा रहे हैं। स्नेक के नाम पर…

स्त्री को नारी कहूँ

स्त्री को नारी कहूँ

स्त्री विमर्श का अर्थ विक्टिम कार्ड खेलना नहीं है। नारी का शोषण यदि कहीं है तब इसका जिम्मेदार कौन है, पुरुषवादी सोच या कुछ और? स्त्री पुरुष की जननी है और माता के रूप में संतान की प्रथम गुरु भी…

सिमटती कांग्रेस

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केंद्र से लेकर राज्यों के चुनाव में कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिर रहा है। ऐसा क्या हो गया जो कांग्रेस को पतन की ओर ले जा रहा है? क्या कांग्रेस की जो नीतियां अभी तक लाभदायक थीं, वही उसके पतन…

भारत का इतिहास

भारत का इतिहास

प्राचीन काल से ही भारत का सम्बन्ध पड़ोसी देशों और अन्य विदेशी शासकों से रहा है, इसका प्रमाण हमें इतिहास में मिलता रहता है। आज भी विश्व में पुरात्विक साक्ष्य मिलते हैं जिनमें भारतीय सम्बन्धों की पुष्टि होती है। भारत…

सत्ता संघर्ष बनाम भारत

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यदि किसी सामाजिक सुधार की बात हो तो कुछ बातें हमें अभी से ध्यान में रख कर विचार करनी होंगी जिससें हमारा सामाजिक ढांचा प्रभावित हुये बिना गतिशीलता, निरन्तरता को प्राप्त कर सके। भारत में आज कई तरह के समूह…

गोधन पर निर्भर मानव जीवन का अस्तित्व

गोधन पर निर्भर मानव जीवन का अस्तित्व

गाय को वैदिक काल से ही भारतीय धर्म, संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक माना गया है। वैदिक सनातन धर्म के जनक वेद स्वयं गौ माता को नमन करते हैं। नमस्ते जायमानायै जाताया उत ते नमः।बालेभ्यः शफेभ्यो रूपायाघ्न्ये ते नमः॥ –…

आंदोलन का लब्बोलुआब

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किसी भी आंदोलन के पीछे की शक्ति होती है ‘जनविश्वास’, जैसे ही हम ‘जनविश्वास’ खो देते हैं वैसे ही आंदोलन खत्म हो जाता है। जनतंत्र में विरोध एक प्रक्रिया है। सत्ता को इससे दो चार होना ही पड़ता है। भारत…

चूक

चूक

देश में सब कुछ परस्पर सम्बन्धों पर आधारित है इसमें अन्नदाता का महिमामंडन या उधोगों की भूमिका कमतर कैसे हो गई? भारतीय अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र की भूमिका GDP में मात्र 14% है, यह अलग बात है कि इसी 14%…