स्वयं को जानना

सुख, विजय है या सुख का अभाव दूसरे पर विजय के लिए उकसाता है? क्या सुख विजय का अंत है? विजय तो स्वयं को बंधनों से मुक्त करना है, स्वयं को जानना ही सच्ची विजय है। सच को जान लेना…

सुख, विजय है या सुख का अभाव दूसरे पर विजय के लिए उकसाता है? क्या सुख विजय का अंत है? विजय तो स्वयं को बंधनों से मुक्त करना है, स्वयं को जानना ही सच्ची विजय है। सच को जान लेना…

आखिरकार मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड नहीं माना, रामन्दिर पर सुप्रिमकोर्ट के फैसले पर रिव्यू याचिका दाखिल कर ही दिया। मुस्लिमों को विवाद पसंद है, उन्हें अब्दुल कलाम से कोई मतलब नहीं लेकिन बाबर पसंद है। वह सुन्नी है जो सुन…

भारत के इतिहास में हिंदुओं की पराजय का एक मात्र कारण रहा है, ‘संगठित नहीं होना’। मुहम्मद बिन कासिम की 712 ईस्वी के युद्ध विजय का विश्लेषण करिये या महाराजा दाहिर के पराजय का कारण, दोनों में यही कारण मिलेगा।…

आज स्वप्न में गांधी जी से मुलाकात हुई, बहुत सी बातें उन्होंने बताई लेकिन कौतूहल का विषय यह हुआ जब उन्होंने कहा कि प्रयागराज के जिला कलक्टर से मेरी बात हुई है, तुम जा कर एक रायफल और एक रिवॉल्वर…

पाकिस्तान का अखबार डॉन कहता है कि भारत हिन्दु राष्ट्र की ओर अग्रसर है, नेहरू का सेकुलिरिज्म खत्म हो गया, अल्पसंख्यक मुस्लिम दोयम दर्जे में चले जा रहे हैं। पाकिस्तान को भारतीय मुसलमानों से इतनी संवेदना है तो उन्हें भारत…

यह बिगबॉस में क्या चल रहा है? और पिछले दो – तीन सालों से नेटफ्लिक्स सीरीज में सेक्रेड गेम्स, मिर्जापुर, अपहरण, कालेज रोमांस, सेक्स चैट में जो दिखाया जा रहा है, हिंसा, सेक्स और नशा उसका आज के टीनएजर पर…

गांधी जिंदाबाद थे, हैं और रहेंगे। वह कल भी राजनीतिक महात्मा थे और आज भी हैं। वह तब भी राजनीति के पर्याय थे और आज भी हैं। गांधीवाद और अहिंसा के नाम पर भले ही कुर्बानियां लोगों ने दी हों,…

2020 में जातिगत आरक्षण को पुनः 10 साल के लिए बढ़ाया जाना है। एक बार फिर टकराव की स्थिति आएंगी। आरक्षण की समीक्षा करके 2020 में आरक्षण की अवधि बढ़ाने के पूर्व यादव या अहीर जो भारत में कभी सामाजिक रूप…

हम भारतियों को इतिहास से सीख लेने की आवश्यकता है। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि मुस्लिमों ने भारत में सामाजिक और धार्मिक लूट की जबकि ईसाई-अंग्रेज ने सांस्कृतिक लूट की और इस सांस्कृतिक लूट को स्थायी बनाने के…

बहकते समाज और संस्कार का अर्थ भारतीय संस्कृति के गिरते मूल्यों से है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हमारी संतति में बढती जा रही है। आधुनिक शिक्षा जो रोजगार के खोखले दावे करती है और अंग्रेजी भी बोलती है, इससे समाज…